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ला-नीना और भारतीय मानसून पर इसका प्रभाव: स्काईमेट वेदर की विशेष रिपोर्ट.
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ला-नीना और भारतीय मानसून पर इसका प्रभाव: स्काईमेट वेदर की विशेष रिपोर्ट.

ला-नीना और भारतीय मानसून पर इसका प्रभाव: स्काईमेट वेदर की विशेष रिपोर्ट. प्रशांत महासागर में बनने वाली मौसमी स्थितियों जैसे ला-नीना, अल-नीनो और न्यूट्रल कंडीशन का भारतीय मानसून पर सीधा असर पड़ता है। वर्तमान स्थितियों के अनुसार, ला-नीना बनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आमतौर पर ला-नीना की स्थिति भारत के लिए अच्छी मानी जाती है, क्योंकि इससे मानसून के दौरान सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना बढ़ जाती है। वीडियो में बताया गया है कि प्रशांत महासागर के पूर्वी हिस्से (नीनो 3.4 इंडेक्स) में जब समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 0.5 डिग्री सेल्सियस या उससे नीचे गिर जाता है, तो उसे ला-नीना घोषित किया जाता है।

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ला-नीना की स्थिति में व्यापारिक पवनें (Trade Winds) मजबूत हो जाती हैं, जिससे गर्म पानी इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया के आसपास जमा हो जाता है। गर्म समुद्र की वजह से अधिक बादल बनते हैं, जिसका सीधा फायदा भारतीय मानसून और दक्षिण-पूर्वी एशिया को मिलता है। इसके विपरीत, अल-नीनो में समुद्र का तापमान बढ़ जाता है और बारिश कम होती है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर के अंत तक समुद्री सतह का तापमान -0.5 डिग्री सेल्सियस तक गिर चुका है, जो यह दर्शाता है कि ला-नीना लगभग बन चुका है।

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